Thursday, November 24, 2011

तूफ़ान

बेचैनियाँ तेरी यूँ ही नहीं हैं
बेताबियाँ तेरी यूँ ही नहीं हैं
कहीं तो उमड़ रहा है तूफ़ान
खामोशियाँ तेरी यूँ ही नहीं हैं

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Tuesday, November 22, 2011

मग़रूर ज़िन्दगी

ज़मीन तो मिल गयी, आसमाँ को पाना है अभी
इस डर को दिल से निकाल, कुछ कर दिखाना है अभी
मग़रूर ज़िन्दगी का, साथ निभाना है अभी
साँसों को अपनी संभाल, बोहत दूर जाना है अभी

Monday, November 21, 2011

मुक़म्मल जहाँ

शब्दों की इस जंग में तू जीत जाए भी तो क्या है
ज़िन्दगी की दौड़ में तू आगे निकल जाए भी तो क्या है
जिस हमसफ़र को राहों में छोड़ आया तू
बिना उसके मुक़म्मल जहाँ मिल जाए भी तो क्या है...

Saturday, November 19, 2011

फितरत

इन 'छोटी' खुशियों की चिंगारियों से क्यों निराश होता है तू ?
कुछ इधर से समेट, कुछ उधर से,
और तबियत से फूँक मार;
कि चिंगारियों से आग जलाना तो तेरी फितरत में है...

Thursday, November 17, 2011

Alone.

With noise cancelling earphones
In a jungle of concrete and stone
This uneasy feeling
Of being so alone.